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रेल की दुनिया में भारत बना विश्वविजेता, भारत के ताज में जुड़ा एक और नया पंख

रेलवे की दुनिया में एक बार फिर भारत ने अपना परचम लहराया है, और दुनिया के सामने साबित कर दिया है कि तकनीक, सेवा ও नवाचार के क्षेत्र में भारत अब पीछे नहीं, बल्कि सबसे आगे है।

देश जब किसी भी क्षेत्र में विश्व स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त करता है, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। इस बार यह गौरव दिलाया है भारतीय रेल ने — और वह भी एक এমন ক্ষেত্রে, जो किसी भी रेल प्रणाली की रीढ़ होता है — रेल इंजन यानी लोकोमोटिव निर्माण में।

भारतीय रेल की उपलब्धियों की सूची पहले से ही लंबी है, जिसने बार-बार दुनिया को चौंकाया है। अब उसमें যুক্ত हुआ है एक और स्वर्णिम अध्याय।

2024-25 वित्तीय वर्ष में भारत ने कुल 1,681 रेल इंजन बनाए हैं, यानी एक साल में 1,681 लोकोमोटिव का निर्माण किया गया — जो कि दुनिया के किसी भी देश के लिए एक रिकॉर्ड है।

रेल मंत्रालय ने खुद इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, ना केवल किसी एक देश बल्कि यूरोप जैसे पूरे महाद्वीप में भी इतने इंजन एक साथ नहीं बनाए गए।

अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका या ऑस्ट्रेलिया — दुनिया के किसी भी कोने में इस पैमाने पर लोकोमोटिव निर्माण नहीं हुआ है।

यह उपलब्धि यह भी दिखाती है कि भारत अब वैश्विक रेल मानचित्र पर एक महाशक्ति बन चुका है।

साल दर साल भारत की उत्पादन क्षमता भी लगातार बढ़ रही है। 2023-24 की तुलना में इस बार 209 इंजन अधिक बनाए गए हैं, जो यह साबित करता है कि भारत न केवल प्रतिस्पर्धा कर रहा है, बल्कि उसे पीछे छोड़ रहा है।

भारतीय रेल की इस ऐतिहासिक कामयाबी ने न सिर्फ देश को गर्व से भर दिया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि ‘मेक इन इंडिया’ अब एक नारा नहीं, बल्कि एक वैश्विक मान्यता प्राप्त सच्चाई बन चुका है। — यह समाचार एजेंसी की रिपोर्ट पर आधारित है

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