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600 यात्रियों की जान सेना ने बचाई बाढ़ में फंसी ट्रेन से

मुंबई से 90 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के वांगनी में बाढ़ के पानी में फंसी महालक्ष्मी एक्सप्रेस ट्रेन के 1500 यात्रियों में से दोपहर तक 600 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए लोगों में नौ गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। अधिकारियों ने शनिवार को इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में 26 जुलाई 2005 को आई भयंकर बाढ़ के बाद से अब तक के सबसे बड़े संयुक्त ऑपरेशन में बचाव दल द्वारा अन्य यात्रियों को निकाला जा रहा है।

भारतीय वायु सेना, सेना, नौसेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), महाराष्ट्र पुलिस, स्थानीय एजेंसियों और वॉलेंटियर्स द्वारा ट्रेन में फंसे लोगों को बाहर निकलने का कार्य जारी है।

बारिश के थोड़ा कम होने के बाद बचाव कार्य को शुरू किया गया ताकि बचे हुए यात्रियों को जल्द से जल्द सुरक्षित बचाया जा सके।

सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुख्य सचिव अजोय मेहता को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से निकासी अभियानों की निगरानी करें और बचाव कार्यो में लगी विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करें।

अभी तक एनडीआरएफ की चार टीमें ट्रेन में पहुंच चुकी हैं और आठ रबड़ की नावों का उपयोग करके यात्रियों को ट्रेन से सुरक्षित निकाल रही हैं।

इसके अलावा बड़े स्तर पर अभियान चलाने के लिए विशेष उपकरणों से लैस भारतीय नौसेना की सात टीमें, भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर, जिसमें एक सीकिंग और एमआई17 शामिल हैं और मुंबई से भारतीय सेना की दो टुकड़ियां पहले ही ठाणे के लिए रवाना हो चुकी हैं।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मुख्यमंत्री फड़नवीस को फोन किया और ट्रेन के यात्रियों के लिए केंद्र से हरसंभव मदद की पेशकश की।

इसके अतिरिक्त किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस का एक बेड़ा बदलापुर में तैनात किया गया है, जिसमें स्त्रीरोग विशेषज्ञ, पैरामेडिक्स सहित तीन दर्जन डॉक्टरों को ड्यूटी पर लगाया गया है।

यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए 14 बसें और तीन टेम्पो भी तैनात किए गए हैं।

जिला प्रशासन ने फंसी हुई ट्रेन और बदलापुर के बीच के रास्ते पर सह्याद्री मंगल कारालय और गांवों के अन्य स्थानों पर भोजन, चाय और साफ पानी की व्यवस्था की है।

बचाए गए कई यात्रियों, जिनमें वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं, उन्होंने चलने की कोशिश की लेकिन बेहद थके हुए होने के कारण वह ताकत खो बैठे और चल नहीं सके। ऐसे में पुलिस और अन्य लोगों ने उन्हें तुरंत अपने कंधों पर उठाया और सुरक्षित स्थानों पर ले गए।

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