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चक्रवात निसारगा बुधवार तटों से टकराएगा

महाराष्ट्र और गुजरात में चक्रवात से पहले अलर्ट जारी कर दिया गया है, क्योंकि यहां तीन जून को राज्यों के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

नई दिल्ली : चक्रवाती तूफान अम्फान की तबाही के बाद एक और तूफान का खतरा मंडराने लगा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को कहा कि तीन जून को चक्रवाती तूफान ‘निसारगा’ महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में हरिहरेश्वर और दमन के बीच उत्तर महाराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के तटों को पार करेगा। आईएमडी के वैज्ञानिक आनंद कुमार दास के अनुसार, यह गोवा के पणजी से लगभग 370 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में, मुंबई से 690 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम और गुजरात के सूरत से 920 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।

दास ने कहा, “इसके दो जून की सुबह तक उत्तर की ओर बढ़ने और फिर उत्तर-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने के बाद हरिहरेश्वर (रायगढ़, महाराष्ट्र) और दमन के बीच उत्तर महाराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के तटों से तीन जून की शाम या रात तक टकराने की प्रबल संभावना है।”

हरिहरेश्वर शहर मुंबई और पुणे दोनों से 200 किलोमीटर की दूरी पर है और दमन से 360 किलोमीटर की दूरी पर है।

दक्षिण-पूर्व और इससे सटे पूर्व-मध्य अरब सागर और लक्षद्वीप क्षेत्र में कम दबाव वाला क्षेत्र सोमवार सुबह तड़के एक डिप्रेशन में बदल गया है।

कम दबाव वाला क्षेत्र और डिप्रेशन आईएमडी के आठ-श्रेणी के पैमाने पर शुरुआत के दो स्तर हैं, जिनका उपयोग चक्रवातों को उनकी तीव्रता के आधार पर वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है।

यह डिप्रेशन सोमवार शाम तक एक गहरे डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। यह आगे और भी उग्र रूप धारण कर लेगा और दो जून को सुबह के समय चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा और फिर तीन जून की शाम या रात तक एक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा।

जब यह एक भयंकर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो जाएगा तो हवा की गति 105 से 115 किमी प्रति घंटा होगी और इसकी गति तीन जून को सुबह 5.30 बजे 125 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाएगी। आईएमडी के अनुसार, चार जून को शाम 5.30 बजे यह चक्रवात कमजोर पड़ जाएगा और हवा की गति 60 से 70 किमी प्रति घंटा तक रह जाएगी।

महाराष्ट्र और गुजरात में चक्रवात से पहले अलर्ट जारी कर दिया गया है, क्योंकि यहां तीन जून को राज्यों के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे अगले कुछ दिनों तक समुद्र में न जाएं।

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