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दिल्ली विधानसभा में मेरी पगड़ी जबरदस्ती निकाली गई : सिरसा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा गुरुवार को उनकी पगड़ी ‘जबरन निकालने’ का आरोप लगाए जाने के बाद दिल्ली विधानसभा में जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला। सिरसा का आरोप है कि उन्हें सदन से बाहर निकाले जाने के दौरान जबरन उनकी पगड़ी को निकाला गया। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने उनके दावे को खारिज किया है।

सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए सिरसा ने आरोप लगाया कि सदन को स्थगित किए जाने के दौरान उनके साथ हाथापाई की गई और उनकी पगड़ी को जबरन निकाला गया।

आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने सदन के भीतर बात करते हुए आरोप लगाया कि जब मार्शल सिरसा से बाहर जाने का अनुरोध कर रहे थे तो उन्होंने खुद अपने हाथों से अपनी पगड़ी निकाली और अपने पैर कुर्सियों में फंसा लिए।

विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने विपक्षी विधायक के कृत्य को निंदनीय करार दिया और मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया।

सदन की कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद हंगामा शुरू हो गया और सिरसा ने अध्यक्ष को हटाने के अपने अनुरोध पर प्रतिक्रिया की मांग की।

सिरसा ने 24 दिसंबर को दिल्ली विधानसभा के सचिव के पास एक नोटिस दाखिल कर प्रस्ताव से एक पंक्ति हटाने के लिए अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की थी। प्रस्ताव में कहा गया था, “सदन ने यह भी तय किया है कि केंद्र को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस ले लेना चाहिए।”

अनुरोध के बाद गोयल ने कहा कि वे इसे नोटिस के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि नोटिस को 14 दिन पहले दिया जाना चाहिए और उन्हें यह नोटिस 24 दिसंबर को मिला था।

भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता, सिरसा और जगदीश प्रधान ने तब सदन में प्रस्ताव से मांग को हटाने पर सवाल किया।

जब अध्यक्ष ने उनके अनुरोध को दरकिनार कर दिया तो सिरसा अध्यक्ष के आसन के समीप आए और गोयल को तीनों भाजपा विधायकों को बाहर निकालने और उन्हें निलंबित करने का आदेश देने के लिए उकसाने लगे। जिसके बाद गोयल ने सदन को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

आप विधायकों ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक मार्शल के कहने पर भी सदन से बाहर नहीं गए, जिसके बाद सदन को स्थगित कर दिया गया।

भारद्वाज ने सदन के भीतर कहा, “सदन के स्थगित होने के बाद मार्शलों ने सिरसा से बाहर जाने का अनुरोध किया। सिरसा ने मार्शलों के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके साथ हाथापाई की। उन्होंने जानबूझकर कुर्सी में अपने पैर फंसा लिए और चिल्लाने लगे कि उनकी पगड़ी जबरदस्ती निकाली जा रही है, जबकि किसी ने उनके सिर या पगड़ी को छुआ तक नहीं था।”

वहीं दूसरी तरफ गोयल ने कहा कि विधायक द्वारा सदन से बाहर जाने के उनके आदेश का पालन नहीं किए जाने से वह दुखी हैं।

गोयल ने कहा, “विपक्ष का यह कृत्य निंदनीय है। वे बार-बार वेल में कूद रहे थे। मैं उनके कृत्य से दुखी हूं।”

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