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ग्रामीणों ने बाहरी लोगों के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध

कई जिलों के ग्रामीण अब बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रहे हैं

कोरोनावायरस के खिलाफ चल रहे जोरदार अभियान ने उत्तर प्रदेश के अंदरूनी ग्रामीण इलाकों में इस हद तक जागरूकता पैदा कर दी है कि कई जिलों के ग्रामीण अब बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रहे हैं। ग्रामीण सभी प्रवेश बिंदुओं पर बैरिकेड जैसी चीजें लगा रहे हैं और बाहर से आने वाले लोगों को लेकर पूरी सतर्कता भी बरत रहे हैं।

हापुड़ जिले के बछलोटा गांव के मुखिया की अनुमति के बिना गांव में प्रवेश करने वाले किसी व्यक्ति पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाने की घोषणा की गई थी। हालांकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद यह नोटिस हटा लिया गया था, लेकिन बैरिकेड्स लगे हुए थे।

ग्राम प्रधान जसवीर ने कहा, “गांव में घुसने की कोशिश करने वालों के लिए हम एक उपाय के रूप में जुर्माने का उपयोग करना चाहते थे। हम उन लोगों को ट्रैक करते रहेंगे जो गांव में आएंगे। हम पुलिस को इसकी सूचना भी देंगे।”

सुल्तानपुर जिले के अर्जुनपुर गांव में भी यहां की प्रधान कमला चौहान ने भी गांव प्रवेश बिंदुओं पर रोक लगा दी है।

ग्रामीणों ने सभी वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए गांव को बाजार से जोड़ने वाली सड़क पर लगे रेलवे लाइन के फाटक को बंद करवा रखा है।

सुल्तानपुर में अभी तक कोई भी कोरोना पॉजिटिव मामले की रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन ग्रामीण कोई चांस लेना नहीं चाहते। यहां के जो दो निवासी चंडीगढ़ से अपने घर वापस आने में कामयाब रहे, उन्हें भी एक स्थानीय स्कूल में क्वारैंटाइन में रखा गया है।

लखनऊ के बाहरी इलाके में बसे मोहनलालगंज गांव ने भी बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।

स्थानीय निवासी विजेंद्र चौरसिया ने कहा, “यहां तक कि स्थानीय निवासियों के रिश्तेदारों को भी यहां आने नहीं दिया जा रहा क्योंकि हम नहीं चाहते कि घातक वायरस यहां फैले। पूरा गांव क्वारैंटाइन में है और लोग सामाजिक दूरी बनाए हुए हैं। हम एक-दूसरे को मदद कर रहे हैं।”

बस्ती जिले में, बस्ती-गोरखपुर राजमार्ग पर कम से कम तीन गांवों ने बाहरी लोगों के प्रवेश की जांच के लिए बेरिकेडस लगाए हैं।

इस इलाके में एक फार्महाउस के मालिक बलवंत ने कहा, “जब प्रवासी अपने घरों को लौटने लगे, तो स्थानीय लोगों ने ये बेरिकेड्स लगाए। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते थे कि दूसरे लोग संक्रमित हों। जो लोग लॉकडाउन के बाद दूसरे राज्यों से लौटे हैं, वे आश्रय घरों में रह रहे हैं।”

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