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पार्टी के कायाकल्प पर कार्य कर रहीं ममता

लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के भारी उलटफेर का सामना करने के कुछ दिनों बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी पर ध्यान देने का वादा किया था। अपने बयान के मुताबिक, बीते दो महीने में ममता बनर्जी अपना ज्यादा समय संगठनात्मक मामलों पर दे रही हैं, जिले के पार्टी नेताओं से मिल रही है और दृढ़ निश्चियी भाजपा को मात देने के लिए रणनीति बनाने की कोशिश में जुटी हैं।

इसमें शायद सबसे बड़ा कदम राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को शामिल करना है। किशोर ने बीते पांच साल से ज्यादा समय में कई सरकारों को जिताने का काम किया है।

ममता बनर्जी की प्रशांत किशोर से अब तक दो चरण की बैठकें हो चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषक का मानना है कि कुछ फैसले, जैसे पार्टी कार्यकर्ताओं को भाजपा से कालाधन वापस करने को लेकर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करना, अवश्य छाप छोड़ेगा।

लेकिन किशोर के मौके पर पहुंचने से पहले ममता बनर्जी ने कट मनी का मुद्दा उठा दिया था। कट मनी या रिश्वत या लाभार्थियों द्वारा दिया जाने वाला कमीशन, यह राशि सरकारी सेवाओं व समाज कल्याण योजनाओं के बदले लाभार्थियों द्वारा ज्यादातर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को दी जाती है।

गांव व कस्बे के लोगों के तृणमूल के खिलाफ लोकसभा चुनाव में जाने और फीडबैक के बाद ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से सार्वजनिक तौर पर लोगों को पैसा वापस करने को कहा। गांव के लोग सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय नेताओं को सरकारी अनुदानों, छात्रवृत्ति व विधवा पेंशन व आवासीय योजनाओं के बदले कुछ फीसदी रकम देने से परेशान हो गए थे।

यह अपनी छवि के साथ-साथ ही पार्टी की छवि में सुधार का प्रयास था, लेकिन इस कदम से उलटा असर हुआ है। भाजपा ने इस अवसर का इस्तेमाल तृणमूल कांग्रेस नेताओं, सार्वजनिक प्रतिनिधियों को बेनकाब करने के लिए किया है और कट मनी को वापस करने की मांग उठाई है।

इसके निपटने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कट मनी के विरोध में प्रदर्शन से परेशान हो चुके अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को नए सिरे से लड़ाई के लिए मुद्दे दिए। ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को शहीद दिवस रैली में दावा किया कि भाजपा नेता एलपीजी कनेक्शन, पेट्रोल पम्प लाइसेंस व एलपीजी केंद्र स्थापना में भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।

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